मंगलवार, 21 अगस्त 2012

संसद है या तबेला !

Tanya Mishra309278_213036502157920_1172034015_n

On your timeline · Remove

साम, दाम, दंड, भेद से कुर्सी पर बने रहेंगे...
शर्म का परित्याग करके नंगे होकर नाचेंगे, क्या उखाड़ लोगे.??
घपले घोटालों से तुम्हे लूटेंगे, आतंकी जीजाओं का साथ देकर तुम्हे मारेंगे, क्या बिगाड़ लोगे.??

कांग्रेस का सत्ता में बने रहने का 2014 तक का लाइसेंस है, मूर्ख भारतीयों.!!
जैसे ही राज्यसभा में कोयला आवंटन घोटाले को लेकर चर्चा शुरू हुई, वैसे कांग्रेस के सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला सभापति के कान में जाकर ये कहकर सदन की कार्यवाही रुकवा दी कि शोरगुल होगा, इसलिये सदन को एडजर्न कर दें.
राज्यसभा में 12:45 बजे जैसे ही नए उपसभापति पी जे कुरियन कुर्सी पर पहली बार बैठने आए, राजीव शुक्ला इस अंदाज में उठे मानों उन्हें बधाई देने जा रहे हों, लेकिन उन्होने वहां जाकर कुरियन से कहा की शोरगुल होगा, पूरे दिन के लिए सदन को स्थगित कर देना.
शुक्ला का यह कहना पूरे सदन को सुनायी दे गया क्योंकि उस समय उपसभापति का माइक ऑन था. इस बात को लेकर सदन में शोर मच गया और पूरे विपक्ष ने शुक्ला को माफी मांगने को कह दिया.
विपक्ष का कहना है कि शुक्ला का यह आचरण सदन के आचरण के विपरीत है कि कोई मंत्री सभापति को जाकर कार्यवाही स्थगित करने की सलाह दे. उसके बाद सभापति ने सदन को बुधवार तक के लिए स्थगित कर दिया. गौरतलब है कि इस वक्त कोयला आवंटन घोटाले में केंद्र सरकार फंसी पड़ी है.
और भी... http://aajtak.intoday.in/story.php/content/view/705990/
'राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि'
वन्दे मातरम्...
जय हिंद... जय भारत...

सोमवार, 20 अगस्त 2012

एक और कश्मीर !!

Suresh Chiplunkar523200_110135575800303_1427195228_n
‎1) सन 1905 में मुस्लिम लीग ने तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में असम को मिलाकर "बंग-ए-इस्लाम" राज्य की माँग की थी…
2) 1931 में ब्रिटिश जनगणना सुपरिन्टेण्डेण्ट ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया, कि पूर्वी पाकिस्तान से बड़ी संख्या में घुसपैठ कर रहे हैं…
3) 1946 में असम के दौरे पर जिन्ना ने बड़े ही विश्वासपूर्वक कहा था कि "असम जल्दी ही उनकी जेब में होगा…"
4) ज़ुल्फ़िकार भुट्टो ने अपनी पुस्तक (The Myth of Independence) में कहा है कि "सिर्फ़ कश्मीर ही हमारी आपसी समस्या नहीं है, बल्कि असम भी है…"
5) शेख मुजीबुर्रहमान ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि, "पूर्वी पाकिस्तान को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए असम को इसमें मिलाना बहुत जरूरी है…"
6) बीके नेहरू (असम के पूर्व राज्यपाल) ने अपनी पुस्तक "Nice Guys Finish Second" में कांग्रेस के तीन नेताओं देवकांत बरुआ, जिन्ना के सचिव मोईनुल हक और कैबिनेट मंत्री फ़खरुद्दीन अली अहमद (जो बाद में राष्ट्रपति भी बने) की असम और बांग्लादेश सम्बन्धी नीतियों की खासी आलोचना की है…
7) भारत की पश्चिमी कमान के जनरल जमील महमूद ने ज्योति बसु और हितेश्वर सैकिया को लिखित में चेता दिया था कि यदि समय रहते बांग्लादेशियों पर काबू नहीं पाया तो हमें अपनी सीमाएं दोबारा रेखांकित करनी पड़ेंगी…
8) इसके अलावा विभिन्न मौकों पर हितेश्वर सैकिया, ज्योति बसु, जनरल एसके सिन्हा, इंद्रजीत गुप्ता इत्यादि लोगों ने अपनी रिपोर्टों तथा विधानसभा-लोकसभा के बयानों में बांग्लादेशी मुसलमानों की विचारपूर्ण और षडयंत्रपूर्ण घुसपैठ का ज़िक्र किया है…
================
इतने सारे लिखित तथ्य होने के बावजूद कांग्रेस-वामपंथी जैसी पार्टियाँ अपने वोटबैंक के लिए तथा वज़ाहत हबीबुल्ला और शबनम हाशमी जैसे कथित बुद्धिजीवी, बांग्लादेशी घुसपैठ और पाकिस्तान के रवैये को समस्या का मूल नहीं मानते हों तब तो इनसे बड़े देशद्रोही और शतुरमुर्गी कहीं और नहीं मिलने वाले…

रविवार, 19 अगस्त 2012

आवाज़ उठाने की सज़ा!

Bharat Swabhiman Trust (Official)
नोटिसों से डरने वाले नहीं हैं …
नई दिल्ली/ब्यूरो/ एजेंसी
Sunday, August 19, 2012
काले धन के मामले पर बिगुल फूंकने वाले योग गुरु स्वामी रामदेव जी पर केंद्र सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है।
आयकर और सेवा कर विभाग की विशेष जांच के बाद अब राजस्व विभाग ने स्वामी रामदेव जी से जुड़े ट्रस्टों का अंतिम कर आकलन करना शुरू कर दिया है।
इस बीच योग गुरु ने कहा है कि वे केंद्रीय विभागों द्वारा भेजे जा रहे नोटिसों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया है। ऐसे नोटिसों से भ्रष्टाचार के खिलाफ उनका आंदोलन थमने वाला नहीं है। वित्त मंत्रालय के आयकर व सेवा कर विभागों ने हाल ही में स्वामी रामदेव जी के इन ट्रस्टों को नोटिस जारी किया था।
सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो (सीईआईबी) तथा सेंट्रल एक्साइज इंटेलिजेंस (डीजी सीईआई) का महानिदेशालय स्वामी रामदेव जी द्वारा संचालित इन ट्रस्टों की आयकर व सर्विस टैक्स देनदारियों की जांच पड़ताल कर रहा है।
स्वामी रामदेव जी ने कहा कि केंद्र सरकार की कई एजेंसियां पिछले करीब सवा वर्ष में उन्हें सौ से अधिक नोटिस भेज चुकी हैं। सभी नोटिसों का यथासमय जवाब दिया गया है। हाल में जो नोटिस आए हैं, उनका भी जवाब दिया जाएगा। आंदोलनों में जो भी धन खर्च होता है उसका वहन जनता करती है। स्वामी रामदेव जी के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने दावा किया कि ट्रस्टों को करों से छूट मिली हुई है क्योंकि ये चैरिटी के काम कर रहे हैं न कि व्यवसायिक कार्य। हम सभी जांच एजेंसियों को जांच में मदद करेंगे। हमारे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है।
(साभार:
http://www.amarujala.com/National/nat-custom-sought-details-of-the-cost-of-movement-of-Baba-Ramdev-30893.html समाचार के सम्पादित अंश| यह समाचार विभिन्न समाचार पत्रों से प्रकाशित खबरों से मात्र सूचना के उद्देश्य से लिये गये हैं)

ईद को कैसे कहूं मैं अब मुबारक ?... राजीव चतुर्वेदी

Rajiv Chaturvedi

‎"ईद को कैसे कहूं मैं अब मुबारक ?
खून जो फैला है सड़क पर वह भी तो मेरा ही है

जिस वतन में हो रहा है यह रमजान की रस्मों की तरह
उस देश का गुनाह है यह महज़
कि हज़रत मुहम्मद महफूज थे इस देश में

उस दौर में जब यजीदी कारवाँ कोहराम करता था

फातिमा के आंसुओं में अक्स है इंसानियत का
सूफियानो की यहाँ औलाद सुन लें और सोचें
कातिलों की यह कतारें कर रही अब अलविदा हैं
अलविदा नावाजों को...मुहम्मद के नवासों को ...अमन की हर रिवाजों को
और यह भी तो बताओ तुम हमें
होली और दीपावली की बधाई तुम कभी भी क्यों नहीं देते
?
और जब हमने आदाब कह कर अदब तुमको दिया

"जय राम जी की"... तुम्हारी जुबान से भी क्यों नहीं फूटा
?
यह माना कि तुम बन्दे हो खुदा के पर कभी बन्दे मातरम क्यों नहीं कहते
?
खौफ खाओ खुदा का, सूफियानो के न तुम वारिस बनो

जो मरे हैं माँ तो उनकी फातिमा भी है
जिन्दगी की इस कर्बला में तुम किधर हो
?
सूफियों के इस वतन में सूफियानो के सिपाही या यजीदी काफिले यह
?
ईद की कैसे कहूं मैं अब मुबारक
?
ईद की किसको कहूं मैं अब मुबारक
?
फातिमा मेरी थी तो सीता उसके पहले तेरी थी यह याद रख

इस धरा पर "गोधरा" तैने किया कह दे याजीदों से
तेरे पुरखे यहीं इस देश के ही थे, यहाँ के ख्वाब तेरे हैं, यहाँ की ख़ाक तेरी है
तू चूम ले इस देश की धरती को,--- यही है फ़र्ज़ अब तेरा
तुम कहो एक बार बन्दे मातरम मैं कहूंगा ईद तुमको हो मुबारक !!" -----राजीव चतुर्वेदी

 

असम के कई इलाकों में बांग्लादेशियों का कब्जा

533161_261441797306362_1857350949_n असम के हालात इस कदर भयंकर है कि दिल्ली में बैठकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। बांग्लादेशी मुसलमानों ने बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया है। यहां से स्थानीय लोगों को भगा दिया गया है। सारी जमीन पर बांग्लादेशियों ने कब्जा कर लिया है। वोट बैंक के कारण असम सरकार की हिम्मत नहीं हो रही है कि वह कोई कार्रवाई करें। जगह -जगह पाकिस्तान और बांग्लादेश के झंडे फहरा दिए गए हैं।
हाल ही में मेरठ कॉलेज के रक्षा अध्ययन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. संजय कुमार ने असम पर शोध किया है। 2011 के जनगणनाआंकड़ों के अनुसार असम के 27 जिलों में से 11 मुस्लिमबहुल जिलों में स्थानीय मूल के लोग अल्पसंख्यक बन गए हैं। असम में 1955 में 95 प्रतिशत क्षेत्रीयलोग थे। 1971 में ये घटकर आधे रह गए। 1971 में बांग्लादेश बनने के बाद अब क्षेत्रीय लोगों की संख्या महज करीब 36 फीसदी रह गई है।
डा. संजय कुमार के मुताबिक असम में 64 फीसदी बाहरी लोग हैं, जिनमें सबसे ज्यादा बांग्लादेशी हैं। आर्थिक विकास न होने और राजनीतिक उदासीनता की वजह से यह हालात हुए हैं। कुछ साल पहले सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को स्थानीय नागरिक बनाने के लिए कानून बदल दिया। चूंकि वे कांग्रेस के वोटर थे। यहींसे असम के हालात और बिगड़ने शुरू हुए। बांग्लादेशियों को लगा कि वोट बैंक के जरिए वह भी कुछ कर सकते हैं। वोट बैंक के कारण कांग्रेस सरकार उनका ही समर्थन करेगी। इसका सबसे भयावह नतीजा .यह है कि असम के सीमा वालेइलाके में बांग्लादेशी मुसलमानो में आबादी बढ़ाने की होड़ मची हुई है। एक -एक आदमी के चार-चार बीबियां और 50-50 बच्चेहैं। ये इन्हें वोटर के रूप में पैदा कर रहे हैं।
इन इलाकों का दौरा कर लौटे कुछ पत्रकारों ने कहा कि यहां के हालात का सही वर्णन करना मुमकिन नहीं हैं। बस यो समझ लीजिए कि कछार समेत कई इलाके तो भारत के हाथ से निकल चुके है। यह पूरी तरह से बांग्लादेश हो चुका है। स्थानीय लोगों को बांग्लादेशियों ने भगा दिया है।स्थानीय लोगों के गांव वीरान हो गए हैं। उनकी हिम्मत नहीं हो रहीहै कि वे अपने घर लौट सकें। सेना की मदद से भले ही वे लौट जाएं लेकिन देर-सबेर उन्हें बांग्लादेशी फिर खदेड़ देंगे। कई जगह बांग्लादेश और पाकिस्तानके झंडे लगा दिए गए हैं। असम को बांग्लादेश बनाने का काम कई दशक से चल रहा है।
बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियां अनुसूचित जाति एवं अन्य हिंदुओं के खेत, घर और गांवों पर कब्जा करके हिंदुओं को भगाने में लगे हुए थे। कारबी, आंगलौंग, खासी, जयंतिया, बोडो, दिमासा एवं 50 से ज्यादा जनजातिके खेत, घर और जीवन पर निरंतर हमलों से खतरा खड़ा हो गया हैं। इनकी जमीन पर बांग्लादेशियों नेकब्जा जमा लिया है। अब हालात विस्फोटक हो गए हैं। सबसे हैरत की बात यह है कि यहां के घुसपैठिए बांग्लादेशी गर्व से कह रहे हैं कि सिलहट. कछार समेत कई इलाके तो जबरन भारत को दे दिए गए थे, ये तो पाकिस्तान के हिस्सा थे। जो अब बांग्लादेश को मिलना चाहिए। जगह-जगह बेहद आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए हैं

शनिवार, 18 अगस्त 2012

इक्कीसवीं सदी का सच

मानवता की सबसे बड़ी त्रासदी226343_196972007101118_1064325031_n
भारत के अधिकांश घरों में बिना हल्दी के खाना नहीं पकता, लेकिन इस देश की कुछ औरतें ऐसी भी हैं जिन्हें हल्दी के रंग से ही नफरत है। बिना दाल के भोजन अधूरा है, लेकिन कुछ महिलाओं को पीले रंग की दाल देखते ही मितली आने

लगती है। लंबे, घने केश औरतों के सौंदर्य के आभूषण माने जाते हैं, लेकिन कुछ औरतों को अपने लंबे, घने बालों से भी घिन आती है। इन विचित्र औरतों से हमारा परिचय हाल ही में आई एक पुस्तक अदृश्य भारत में होता है।
ये महिलाएं हमारे मल के साथ ही हमारी इंसानियत को टोकरियों में भरकर अपने सिर के ऊपर रखती हैं। उन टोकरियों में भरा मैला उनके जेहन पर इस कदर तारी हो गया है कि खुद से और इंसानियत से घिन आने लगी है। इसीलिए हल्दी देखकर वे गश खा जाती हैं, पीली दाल देखकर उन्हें मितली आने लगती है और अपने घने, काले बालों से वे इसलिए घृणा करती हैं, क्योंकि उनमें समा गए हमारे मल की दुर्गध कभी कम होती ही नहीं। इन औरतों के लिए दुनिया की बहुत-सी खूबसूरत चीजें बदसूरत बन चुकी हैं जैसे बारिश। इन औरतों के लिए बरसात का मतलब है टपकती हुईं टोकरियां, जिनके बजबजाते मल से उनका शरीर, उनका मन और उनकी आत्मा सब भर जाते हैं।
ये औरतें हर शहर, कस्बे और गांव में सिर पर मैला ढोने का तो काम करती ही हैं, साथ ही रेलगाडि़यों से गिरने वाले मल को रेलवे लाइन से उठाती भी हैं। और हम हैं कि उनकी ओर देखना भी नहीं चाहते। शायद इसलिए कि उन्हें देख लेंगे तो हमें इस बात का अहसास हो जाएगा कि उनकी टोकरी में हमारे मल के साथ-साथ हमारी इंसानियत भी लिपटी हुई है। अगर ऐसा न होता तो क्या मजाल है कि वह टोकरी 2012 में भी उनके सिर पर टिकी होती।
पूरी दुनिया में पुराने जमाने के शुष्क (बिना फ्लश के) शौचालय या तो खत्म कर दिए गए हैं या फिर खत्म किए जा रहे हैं। कहीं भी रेलवे लाइन के ऊपर रेलगाडि़यों से गिरता हुआ मैला अब नजर नहीं आता, लेकिन हमारे देश में शुष्क शौचालयों की भरमार है और हमारी रेलवे लाइन ही नहीं, बल्कि तमाम सड़कें, गलियां और नालियां खुला शौचालय बनी हुई हैं।
संतोष की बात यह है कि इस पद्धति को समाप्त करने की आवाजें भी उठती रही हैं। सफाई कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय आयोग का गठन किया गया है। आयोग की सिफारिशें तो अलमारियों में दीमक के हवाले कर दी गईं, लेकिन आवाजें बंद नहीं हुईं। देश के कई भागों में सफाई कर्मचारियों ने आंदोलन छेड़ दिए। इसका नतीजा हुआ कि 1993 में मैला ढोने वालों को काम पर रखने और शुष्क शौचालयों का निर्माण निषेध करने वाला अधिनियम पारित किया गया। इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति को मानव-मल ढोने के काम पर लगाया जाना गैर-कानूनी है। शुष्क शौचालयों के निर्माण व प्रबंध पर रोक लगा दी गई है। साथ ही मैला ढोने के काम में लगे लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करने का प्रावधान है, लेकिन यह कानून फाइलों में कैद होकर रह गया। जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया।
इस संबंध में अपील दायर करने पर जब सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों से जानकारी मांगी कि कानून का क्रियान्यवन किस हद तक किया गया है तो सब राज्यों का जवाब था कि मल ढोने वाला कोई कर्मचारी नहीं है और तमाम शुष्क शौचालयों को जल-चालित बना दिया गया है।

कोर्ट के सामने मल ढोने वाली महिलाओं को खड़ा करके इन झूठे बयानों का पर्दाफाश किया गया, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय भी असहाय नजर आया। किसी भी अधिकारी को इस बात के लिए दंडित नहीं किया गया कि उसने कानून का पालन नहीं किया है। कानून लागू करने में सरकार की ढिलाई ने सफाई कर्मियों के संगठनों को आक्रोशित कर दिया। मैला ढोने वालों ने विभिन्न शहरों में अपनी टोकरियों में आग लगा दी और बहुत से शुष्क शौचालयों को ध्वस्त कर दिया।


images1 सर्वोच्च न्यायालय के सामने दिए गए सरकारी हलफनामों की सच्चाई को परखने के लिए अदृश्य भारत की लेखिका भारत भ्रमण पर निकलीं। उन्होंने पाया कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक इस कानून की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दिल्ली के नंदनगरी की मीना ने बताया कि मैला ढोने के कारण गर्भ में उनकी बेटी को संक्रमण हो गया। यह लड़की विकलांग पैदा हुई। इसके बाद से मीना ने मैला ढोने से तौबा कर ली और मैला ढोने के खिलाफ चलने वाले अभियान से जुड़ गईं। झूठ को सच मे तब्दील करने की कला का नमूना बिहार की राजधानी पटना की यात्रा के दौरान देखने को मिला। शहर की अनेक कॉलोनियों में टॉयलेट में फ्लश तो लगे हैं, किंतु मैला निकालने के लिए कोई सीवर लाइन नहीं है। जिस टैंक से पूरे इलाके के ये फ्लश टॉयलेट जुडे़ हुए हैं, उसकी सफाई दिन में नहीं, रात में होती है ताकि उस घिनौने दृश्य को देखने की तकलीफ वहां रहने वाले सभ्य लोगों को उठानी न पडे़।


सिर पर मैला ढोने वाले सबसे अधिक व्यक्ति उत्तर प्रदेश में हैं। एक लाख से अधिक ये लोग रोजाना नर्क भोगते हैं। यूपी के सबसे बड़े शहर कानपुर के तमाम पुराने मोहल्लों में औरतें ही मल साफ करती हैं। यह तब है जब राष्ट्रीय सफाई आयोग के अध्यक्ष रहे पन्नालाल तांबे इसी शहर के रहने वाले हैं। पन्नालाल कहते हैं कि जब हम गंदगी को खत्म कर सकते हैं, शुष्क शौचालय खत्म कर सकते हैं तो सरकार क्यों नहीं कर सकती? लेखिका जब अपनी यात्रा के दौरान आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले की नारायण अम्मा से मिलीं तो उनके बालों में फूलों का गजरा सजा था। उन्होंने कहा कि मैला ढोने का काम छोड़ने के बाद ही मुझे खुद के इंसान होने पर विश्वास हुआ। मैंने इस खुशी के लिए लंबा संघर्ष चलाकर नर्क से मुक्ति हासिल की है। हम सबकी मुक्ति भी नारायण अम्मा जैसी औरतों की मुक्ति के साथ जुड़ी हुई है। (लेखिका लोकसभा की पूर्व सदस्य हैं)

 

कौन हैं ये दहशतगर्द ?

Arvind Jadoun

559123_10151012016287773_364302148_n
भारत में नफरत-दहशत के पीछे आईएसआई, पाकिस्‍तान से फैलाए गए एसएमएस........

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में हाल ही में पूर्वोत्तर के लोगों को आए आपत्तिजनक एसएमएस-एमएमएस के पीछे पाकिस्तान के उपद्रवी तत्वों का हाथ पाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की जांच में सामने आया है कि करीब 100 ऐसी वेबसाइटें हैं जिन पर भारत में हिंसा भड़काने वाली फोटो और संदेश लिखे हुए हैं। इस बीच शनिवार को इलाहाबाद मे
लगाया गया कर्फ्यू भी हटा दिया गया। सीबीआई ने असम हिंसा की जानकारी देने वाले को एक लाख रुपए का इनाम देने की घोषणा की है।
केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने शनिवार देर शाम कहा कि मंत्रालय ने इन संदेशों और फोटो के अपलोड होने का स्थान पता लगाने के लिए दो टीमों का गठन किया था। इन टीमों ने पाया है कि ये सभी पाकिस्तान से किए जा रहे हैं। सिंह ने कहा कि इनमें से 76 वेबसाइटों को ब्लाक कर दिया गया है जबकि 34 अन्य को ब्लाक करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, 'जिन तस्वीरों को अपलोड किया गया है, उनमें से कुछ म्यांमार की पुरानी हिंसक घटनाओं की तस्वीरें हैं। इन्हें जानबूझकर भारत में हिंसा फैलाने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाडऩे के लिए अपलोड किया गया है। यह बेहद आपत्तिजनक है और हम इसे सार्वजनिक इसलिए कर रहे हैं कि दुनिया को पता लगे कि पाकिस्तान के शरारती तत्व किस तरह का काम कर रहे हैं।' गृह मंत्रालय इस मामले को विदेश मंत्रालय के जरिए पाक के समक्ष उठाएगा। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा 7 सितंबर से अपनी तीन दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान दहशत भरे एसएमएस के पीछे वहां के शरारती तत्वों के हाथ का मामला उठाएंगे। इस बारे में पड़ोसी देश से लिखित में आपत्ति भी दर्ज कराई जाएगी और वे दस्तावेज भी सौंपे जाएंगे जिनसे यह प्रमाणित होगा कि जिन संदेशों और तस्वीरों से भारत में दहशत फैली है, वह पाकिस्तान से अपलोड किए गए हैं। केंद्रीय गृहसचिव आरके सिंह ने 'भास्कर' से कहा, 'यह संवेदनशील मामला है। इसलिए हमने लिखित में ही आपत्ति दर्ज कराने का निश्चय किया है। अगर जरूरत समझी गई तो पाक गृह सचिव से बातचीत से भी गुरेज नहीं करेंगे।'
उधर, सूत्रों के मुताबिक इस मामले में गृह मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय को आईएसआई का हाथ होने के भी साक्ष्य दिए हैं। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान पाक को सभी संबंधित साक्ष्य दिए जाएंगे। उससे कहा जाएगा कि वह इन मामलों के पीछे मौजूद लोगों को गिरफ्तार कर उन्हें सजा दे। पड़ोसी देश से यह भी कहा जाएगा कि द्विपक्षीय संबंधों में जिन बातों से दरार आती है, उसे रोकने के लिए वह समुचित कदम उठाए। इस बीच, दक्षिण भारत से शुरू हुए ये एसएमएस शनिवार को राजधानी दिल्ली पहुंच गए। लेकिन पुलिस ने उत्तर पूर्व के लोगों को पूरी सुरक्षा देने का वादा किया है। दिल्‍ली पुलिस ने ऐसे सभी एसएमएस को केवल अफवाह बताया है। संयुक्त पुलिस आयुक्त रॉबिन हीबू ने कहा, 'उत्तर पूर्व के लोगों के खिलाफ झूठे एसएमएस भेजे जा रहे हैं। खासकर जिनमें हमले की धमकी दी जा रही है। उधर, अफवाहों के चौथे दिन भी बेंगलुरु से पलायन जारी रहा। वहीं पिछले चार दिनों से दक्षिण भारतीय राज्यों में उत्तर पूर्व के लोगों के खिलाफ दहशत भरे एसएमएस भेजे जा रहे हैं।
यूपी पहुंची असम हिंसा के विरोध की आगअसम में और हिंसा, कर्नाटक में अफवाह फैलाने के आरोप में कई गिरफ्तार किए जा चुके हैं॥ और कुछ की तलाश है