सोमवार, 24 दिसंबर 2012

तस्वीर के कई पहलू हैं ...

Rajiv Chaturvedi shared Gunjan Mishra's photo.
‎"मत भूलिए कि दामिनी के प्रसंगवश चल रही बहस दिल्ली के पुलिस कोंस्टेबिल सुभाष तोमर की मौत की बजह से दागदार हो चुकी है . सुभाष तोमर भी भारत का ही नागरिक था . समाज को सम्यकता में देखिये और देखिये गरीब नहीं ...मध्यम वर्ग बल्कि अभिजात्य वर्ग की औरतें नंगई पर आमादा हैं .समाज में कामुकता कौन परोस रहा है ?...कामोद्दीपन कौन कर रहा है ? हर बलात्कारी ...गली मोहल्ले के लुच्चे कामुक लफंगे से तो निपटा ही जाए पर समाज में पूनम पांडे और राखी सामंतों ,मल्लिका शेहरावतों से भी लगे हाथों निपटा जाए . चूंकि पुरुष "बहिरंग" होता है अतः उसकी लफंगई की हरकतें भी बहिरंग होती हैं और स्त्री स्वभाव से " अन्तरंग" होती है अतः उसकी लफंगई की हरकतें भी अन्तरंग होती हैं . हम जैसा समाज तैयार करते हैं वैसा ही भोगते हैं ...अभी हाल ही की दिल्ली की घटना नहीं घटनाओं पर गौर करें ...वह जो कामुक पुरुष कुत्तों जैसे सड़क पर गली चौराहों पर लार टपकाते महिलाओं को हवसी निगाहों से ताकते हैं ....वह कुत्तों जैसे पुरुष किन कुतियों के बेटे हैं ?...किन कुतियों के प्रेमी हैं ?...और उन लडकीयों /महिलाओं पर भी गौर करें जो कल नारे लगा रही थीं --"देखने वाले तेरी नज़रों में ही पाप है / मेरी स्कर्ट से ऊंची मेरी आवाज़ है " क्या कहना चाहती हैं वह ? ...यही न कि "जैसे -जैसे उनकी आवाज़ ऊपर उठेगी उनकी स्कर्ट भी और ऊपर उठ जायेगी " ...कहा तो यह जाना चाहिए था --"देखने वाले तेरी नज़रों में "भी" पाप है / मेरी स्कर्ट से ऊंची मेरी आवाज़ है" पर इसमें तो दोष की साझेदारी हो जाती . ...बलात्कार हो जाने के बाद पुलिस /सरकार की भूमिका होती है पर बलात्कार की घटनाएं न हों इसमें सरकार की नहीं समाज की भूमिका होती है ...क्या हमारा समाज यह भूमिका निभा रहा है ? क्या आवारा कुकुरनुमा लड़कों से उनके माता -पिता पूछते हैं उनकी आवारगी के रहस्य ...क्या उनकी अदाओं पर परिवार सेंसर बोर्ड की तरह काम करता है ? ...क्या माता -बहने उनको संस्कार देती हैं ? ...क्या कंजूस कपड़ों के वाबजूद उनमें खिड़की -रोशनदान बनवाये लडकी जब कुछ कर गुजरने की तमन्ना लिए जब पढ़ने जाती है तो माँ पूछती है कि पढने जा रही हो या कैबरे करने ? जब घर-परिवार अपने आंतरिक दायित्व में असफल हो जाता है तो समाज सेंसरबोर्ड की तरह सलीके से रहने की आचार संहिता लागू करता है ...तब चिल्ल-पों होती हैं सोसल पुलिसिंग/खाप गलत है ...कुत्तेनुमा आवारा पुरुषों की बातें तो होगई पर ताली तो दोनों हाथ से बजती है .... कुतियानुमा स्त्रीयों की भी बात तो हों नहीं तो बात एक पक्षीय ही रह जायेगी . कहा जारहा है कि समाज के 50% पुरुष चरित्रहीन हैं ...हो भी सकते हैं ...मान लिए हैं ...अब समझ लें --एक चरित्रहीन पुरुष के कम से कम दो स्त्रीयों से सम्बन्ध होना जरूरी है ...अब बताएं अगर 50% पुरुष चरित्रहीन है तो शत प्रतिशत स्त्रीयां भी तो चरित्रहीन हुईं ---इसलिए ऐसे वीभत्स तर्क न दें ...लडकियां "हौट" और "सेक्सी" अपनी प्रसंशा मानती हैं ...तो कितनी हौट और कितनी सेक्सी की पैमाइश कैसे होगी ? "...Guy with an attitude" लड़कियों में प्रचलित जुमला है ...किस बात का attitude ? प्रख्यात दार्शनिक राखी सामंत कहती हैं -"Rape is sex in surprise" एक अन्य विदुषी रीना जैन कहती हैं --"Virginity is just lack of opportunity. " --- इस समाज पर श्यापा नहीं कीजिये इसे सुधारिए ...यह हमारा आपका समाज है इसे हमने गंदा किया है ... इसे हम ही साफ़ करेंगे ." ---- राजीव चतुर्वेदी
प्रदर्शन का यह तरीका ठीक नहीं है ।कृपया बलात्कार के खिलाफ प्रदर्शन करे न की अंग प्रदर्शन । इस तरह के प्रदर्शन से भारतीय संस्कृति शर्मसार हो रही है । यह तरीका विरोध जताने का नहीं बल्कि अश्लीलता परोसने का है । इसलिए आप लोगो से मेरा विनम्र अनुरोध है की प्रदर्शन के लिए दुसरे तरीको को अपनाएं ।
प्रदर्शन का यह तरीका ठीक नहीं है ।कृपया बलात्कार के खिलाफ प्रदर्शन करे न की अंग प्रदर्शन । इस तरह के प्रदर्शन से भारतीय संस्कृति शर्मसार हो रही है । यह तरीका विरोध जताने का नहीं बल्कि अश्लीलता परोसने का है । इसलिए आप लोगो से मेरा विनम्र अनुरोध है की प्रदर्शन के लिए दुसरे तरीको को अपनाएं
राजीव दीक्षित की पोस्ट से साभार ....

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

लो... अब खाओ विदेशी राशन.... डा0 प्रवीण तोगड़िया

  • Pravin Togadia
    लो! अब खाओ आलू गेहू अमरिका के, लहसून चीन का, टोमेटो यूरोप के, कुकर की १० सीटियाँ करके भी न गलने वाली कड़क प्लास्टिक जैसी दाल कोरिया की, चावल प्याज पाकिस्तान का, शिमला मिर्च इटाली की और पता नहीं क्या क्या कहाँ कहाँ का! साडी सी पिन तक चीन से आती है, प्लास्टिक की डिब्बी भी चीन कोरिया से आती है, रीबोक वाले शूज की लेस भी इंडोनेशिया में बनवा लेते हैं, प्रोक्टर एंड गेम्बल वाले सेनिटरी नेप्किंस, विक्स तक इ
    म्पोर्ट कर यहाँ बेचते हैं, केलोग्स कोर्न फ्लेक्स वाले मकई के दाने बाहर से लाते हैं. इन सभी की घाटा सहने की शक्ति भारत के छोटे दुकानदारों और उत्पादकों से अधिक है. केलोग्स वाले भारत में आये तब उन्होंने प्रेस में कहा था - हम १३ वर्ष घाटा सह सकते हैं, लेकिन भारतीयों की सुबह के नाश्ते की आदतें बदलकर ही रहेंगे. आज शहरों के कई लोग इडली, पोहा, पराठा, पूरी -कचोडी जलेबी समोसा छोड़ कोर्न फ्लेक्स खाकर शाला. ऑफिस जाते हैं. जिस देश में भूखमरी से मरनेवालों का प्रमाण २८% हो, छोटे किसानों का प्रमाण ७०% हो (जिनसे विदेशी खुर्दा बझार वाले कुछ नहीं खरीदते) उस देश में देश की परंपरागत यशदायी अर्थनीति त्याग कर देश को देखते हैं कहाँ ले जा रहे हैं. कोई जापान से ट्रेनें लाने जा रहे हैं, कारें लाने जा रहे हैं तो कोई खुर्दा बझार में विदेशी पूंजी! प्रगति अच्छी होती हैं जो सभी गरीबों को भी को साथ ले. अब विदेशी कब भारत के आम आदमी को साथ लेकर चले हैं, यह नहीं जानते हम. सेवा नहीं, व्यवसाय कर मुनाफा करने आ रहे हैं. भारत के किसान को बहुत रुपये मिलेंगे कहती है सरकार. देखते हैं कितना सच कहती है - या बाकी सभी वादों जैसा यह भी खोखला वादा. सुषमाजी ने बहुत अनुसंधान कर अच्छी तरह से इस विषय पर पक्ष रखा था. राजनीति और देश का कल्याण दोनों साथ साथ चलते तो आज सुषमा जी ने लाया हुआ प्रस्ताव नहीं गिरता. अब बेहतर यही है की बड़े बड़े विदेशी दुकानों की चमक दमक से बहक कर वहाँ खरीदारी न करे और अपने पास वाले हमेशा के किराना 'अंकल' से ही वस्तुएँ खरीदें. चाहे तो वालमार्ट, कोसको, केरिफोर के एयर कंडिशन में घुमने चले जाइए लेकिन खरीदें अपने हमेशा के किराना दूकान से - कीमत तो वे भी आप के लिए कम करते हैं, महीनो महीनो बिल न दो तो रुकते हैं. सोचियेगा! सबसे बेहतर है की अब हिंदू राष्ट्र की ओर ही चलियेगा!

    शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

    ये कहाँ आ गए हम... युद्धवीर सिंह लांबा

    • युधवीर सिंह लाम्बा भारतीय
      जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ????????
      भारत में बुजुर्गों के लिए नित नये आश्रम बन रहे हैं। उनके लिए घर में जगह नहीं है। अंग्रेजी शिक्षित परिवारों, सुसज्जित आधुनिक घरों और स्वार्थी लोगों में चुके हुए पुराने जमाने के मां-बाप फिट नहीं बैठते। उनकी धन-सम्पलि और जमीन-जायदाद काम की होती है। बुजुर्गों
      के प्रति ऐसा रवैया मानसिक रूप से बीमार समाज का परिचायक है। यह स्थिति सचमुच दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।
      जिस जिगर के टुकड़े को पालने में मां-बाप ने अपना पूरा जीवन लगा दिया, मां खुद गीले में सोई और अपने लाल को सूखे में सुलाया, लेकिन मां-बाप को जब बुढ़ापा आया तो इन जिगर के टुकड़ों को मां-बाप अखरने लगे। उनकी अनदेखी होने लगी। ऐसे मामले में भी लगातार सामने आ रहे हैं जब ये लाड़ले ही अपने मां-बाप को घर से निकाल कर ओल्ड एज होम में छोड़ आए। कई ऐसे मामले भी हैं जब इन्हीं बच्चों ने मां-बाप को घर में कैद कर लिया या फिर खुले आसमान के नीचे उन्हें अपने हाल पर आंसू बहाने के लिए छोड़ दिया।
      हमें ओल्ड एज होम की कतई भी आवश्यकता नहीं है यदि ये बढ़ रहे है तो यह हमारे मानव समाज के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है । जो माता पिता हमें ऊँगली पकर कर चलना सिखाते है उनके बुढ़ापे में हम उन्हें सम्मान के साथ रख नहीं सकते धिक्कार है हमें! मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज की तरह बुजुर्ग पीढ़ी में अकेलेपन की भावना तेजी से बढ़ रही है।
      ये वही भारत देश है जहाँ राम ने अपने वृद्ध पिता का आदेश मान कर 14 बरस वन का वास किया था, ये वही देश है जहाँ श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कांवर में बैठा कर तीर्थ यात्रा के लिए ले जाता है ।
      हमारी संस्कृति में सदा ही बड़े बुजुर्गों को पूजनीय माना गया है। गोस्वामी तुलसी दास ने भी रामचरित मानस में प्रात काल उठि के रघुनाथा, मात-पिता गुरु नावहिं माथा चौपाई से बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद से परिवार फलता-फूलता है। हमारे वृद्धजन ही हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हुए समाज के हित में काम करने की प्रेरणा देते हैं। इसलिए हमें अपने बड़े-बुजुर्गों का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। इससे ही हमारी वसुधैव कुटुम्बुकम की नींव को बल मिलेगा।
      जो युवा अपने माता पिता को वृद्धाश्रमों में भेजते हैं, जो उन्हें बोझ समझते हैं कि वह कभी भी सुख नहीं पा सकते है | 'जिस माँ ने नौ महीने अपने गर्भ में पाला है आज वो दर -दर की ठोकरे खा रही है ..
      वेदों में कहा गया है की -|पिता धर्म है ,पिता स्वर्ग है तथा पिता ही तप है ,आज भारतीय युवाओं के पास अपने बुजुर्गों के लिए समय नहीं है जबकि भारतीय समाज में माता-पिता की सेवा को समस्त धर्मों का सार है |
      जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!
      जागो भारत जागो -:- मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज (अमेरिका , इंग्लैंड) की तरह ओल्ड एज होम ????????

भारत में बुजुर्गों के लिए नित नये आश्रम बन रहे हैं। उनके लिए घर में जगह नहीं है। अंग्रेजी शिक्षित परिवारों, सुसज्जित आधुनिक घरों और स्वार्थी लोगों में चुके हुए पुराने जमाने के मां-बाप फिट नहीं बैठते। उनकी धन-सम्पलि और जमीन-जायदाद काम की होती है। बुजुर्गों
के प्रति ऐसा रवैया मानसिक रूप से बीमार समाज का परिचायक है। यह स्थिति सचमुच दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।

जिस जिगर के टुकड़े को पालने में मां-बाप ने अपना पूरा जीवन लगा दिया, मां खुद गीले में सोई और अपने लाल को सूखे में सुलाया, लेकिन मां-बाप को जब बुढ़ापा आया तो इन जिगर के टुकड़ों को मां-बाप अखरने लगे। उनकी अनदेखी होने लगी। ऐसे मामले में भी लगातार सामने आ रहे हैं जब ये लाड़ले ही अपने मां-बाप को घर से निकाल कर ओल्ड एज होम में छोड़ आए। कई ऐसे मामले भी हैं जब इन्हीं बच्चों ने मां-बाप को घर में कैद कर लिया या फिर खुले आसमान के नीचे उन्हें अपने हाल पर आंसू बहाने के लिए छोड़ दिया।

हमें ओल्ड एज होम की कतई भी आवश्यकता नहीं है यदि ये बढ़ रहे है तो यह हमारे मानव समाज के मुंह पर एक जोरदार तमाचा है । जो माता पिता हमें ऊँगली पकर कर चलना सिखाते है उनके बुढ़ापे में हम उन्हें सम्मान के साथ रख नहीं सकते धिक्कार है हमें! मातृ देवो भव, पितृ देवो भव की संस्कृति वाले देश भारत में भी अब पश्चिमी समाज की तरह बुजुर्ग पीढ़ी में अकेलेपन की भावना तेजी से बढ़ रही है।

ये वही भारत देश है जहाँ राम ने अपने वृद्ध पिता का आदेश मान कर 14 बरस वन का वास किया था, ये वही देश है जहाँ श्रवण कुमार अपने अंधे माता पिता को कांवर में बैठा कर तीर्थ यात्रा के लिए ले जाता है ।

हमारी संस्कृति में सदा ही बड़े बुजुर्गों को पूजनीय माना गया है। गोस्वामी तुलसी दास ने भी रामचरित मानस में प्रात काल उठि के रघुनाथा, मात-पिता गुरु नावहिं माथा चौपाई से बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद से परिवार फलता-फूलता है। हमारे वृद्धजन ही हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हुए समाज के हित में काम करने की प्रेरणा देते हैं। इसलिए हमें अपने बड़े-बुजुर्गों का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। इससे ही हमारी वसुधैव कुटुम्बुकम की नींव को बल मिलेगा।

जो युवा अपने माता पिता को वृद्धाश्रमों में भेजते हैं, जो उन्हें बोझ समझते हैं कि वह कभी भी सुख नहीं पा सकते है | 'जिस माँ ने नौ महीने अपने गर्भ में पाला है आज वो दर -दर की ठोकरे खा रही है ..

वेदों में कहा गया है की -|पिता धर्म है ,पिता स्वर्ग है तथा पिता ही तप है ,आज भारतीय युवाओं के पास अपने बुजुर्गों के लिए समय नहीं है जबकि भारतीय समाज में माता-पिता की सेवा को समस्त धर्मों का सार है |

जय हिन्द, जय भारत ! वन्दे मातरम !!

      मंगलवार, 27 नवंबर 2012

      चम्पादक और पुलिस संवाद.... डा अनिल पाण्डेय


      डा. अनिल पांडेय

      चम्पादक - जी, आप कैसे गिरफ्तार कर सकते हैं एक चम्पादक को...वो भी दफ्तर से...
      पुलिस अधिकारी - आपके खिलाफ़ वारंट है...
      चम्पादक - वारंट से क्या होता है...हम चम्पादक हैं...कानून वानून नहीं मानते...
      पुलिस अधिकारी - डंडा तो मानते हो कि नहीं...
      चम्पादक - देखिए ये महंगा पड़ सकता है...
      पुलिस अधिकारी -100 करोड़ हैं ही नहीं हमारे पास...2-3 लाख में आपका पेट नहीं भरेगा...क्या करोगे...चलो अब...
      चम्पादक - मेरी पहुंच बेहद ऊपर तक है...
      पुलिस अधिकारी - मेरे भी बॉस वही हैं...
      चम्पादक - सस्पैंड करवा दूंगा...
      पुलिस अधिकारी - बहुत करवा लिया...आज तो बदले का दिन है...
      चम्पादक - थाने चलो, वहीं देखते हैं...वर्दी का घमंड है...
      पुलिस अधिकारी - चलो...वर्दी उतार कर ही बात करेंगे आज रात...
      चम्पादक - अच्छा..अरे...ओह..बुरा मान गए क्या...देखो अपन तो भाई भाई हैं...
      पुलिस अधिकारी - मैं तो कभी गिरफ्तार नहीं हुआ...कैसे भाई...
      चम्पादक मालिक को फोन लगाते हैं....
      फोन पर - डायल किया गया नम्बर फिलहाल स्विच ऑफ़ है...
      चम्पादक - मरवा दिया @#$%^& ने...बोले धंधा लाओ...वाट ही लगवा दी...कहा था टिंगल टेढ़ा आदमी है...पावरप्राश के दो स्लॉट और ले आते...बाकी पांटी से बात करवा देते...कुछ ज़मीनें दिलवा देते...
      पुलिस अधिकारी - बेटा, तुमको भी तो बड़ी पड़ी थी, जल्दी चैनल हेड बनने की...जब रिपोर्टर थे...थाने आते थे...तभी से लक्षण दिखते थे...लेकिन 10-20 हज़ार की दलाली से इतनी जल्दी उड़ने की इच्छा से ये ही होना था...खिचड़ी गर्म हो तो किनारे से खाना शुरु करो...बीच से खाओगे तो मुंह जलाओगे...
      चम्पादक - अब ज्ञान न दो...मालिकवा भी फोन नहीं उठा रहा...
      पुलिस अधिकारी - चलो...क्या करना है...
      चम्पादक - रुको एक फोन और कर लें...
      (चम्पादक न्यूज़रूम में फ़ोन लगाता है...)
      चम्पादक - सुनो...हम दोनों को पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है...ब्रेकिंग चलवाओ...और अगला बुलेटिन चलाओ...फोनो लो...लाइव लो...मेन एंकर को लगा दो...लोकतंत्र पर हमला...सम्पादकों की गिरफ्तारी...सरकार का मीडिया पर हमला...आज़ादी छीनने की कोशिश...मीडिया पर दबाव बनाने की कोशिश...लोकतंत्र के चौथे खंभे की नींव में पानी भरने की सरकारी साज़िश...जो जो याद आए, सारे जुमले ठेल दो...और हां एंकर लिंक लिख कर पढ़वाना...नहीं बहुत अक्खड़ एंकर है...मन से बोला तो ऐसी तैसी करवा देगा...सम्पादक की गिरफ्तारी कैसे कर सकते हैं...भले ही राष्ट्रपति की कर लें...हां याद रखना...लोगों को इमरजेंसी की याद भी दिला देना...समझे...
      पुलिस अधिकारी - बहुत हो गया...चलो रास्ते से बीयर भी लेनी है, दिल्ली में दुकान दस बजे बंद हो जाती है...बाकी बात वकील से करना...
      चम्पादक - अच्छा...वो बीयर लेना तो एक ओल्ड मॉंक का अद्धा भी ले लेना...बाकी तो लोकतंत्र की हत्या हो ही गई...ग़म ही ग़लत कर लें...
      पुलिस वाला मुस्कुराता है...
      *****************************************
      (इसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेना देना नहीं है...हो तो वो खुद ज़िम्मेदार है...)

      शनिवार, 24 नवंबर 2012

      आप लोगो की इन सभी मुद्दों पर क्या राय है?--- अनिल गुप्ता


      अनिल गुप्ता
      १. POTA : यह कानून काफी सख्त कानून था आतंकवाद के खिलाफ .. यह कानून कांग्रेस ने सत्ता में आते ही हटा दिया था. आप लोगो की क्या राय है?
      २. Fertility Control act: यह कानून का असली मकसद देश की जनसँख्या को नियंत्रित करना होगा .. इस कानून के तहत एक परिवार के सिर्फ और सिर्फ २ बच्चे हो सकते है . अगर किसी भी परिवार में दो से ज्यादा बच्चे होते है तोह उसको किसी भी त
      रह की सरकारी मदद नहीं मिलेगी , न कोई सरकारी नौकरी | यह कानून इसीलिए जरुरी है क्यूंकि आज देश में संसाधन बहुत तेजी से इस्तेमाल हो रहे है और बदती जनसँख्या के कारण महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी भी बड रही है ..
      ३. Border Security: इस कानून के तहत भारत की पूरी सीमा ८ मीटर ऊँची और १ मीटर मोटी दीवार से सील कर दी जाएगी .. पूरी सीमा पर भारत के जवान होंगे , अगर कोई भी घुसपैठिया भारत की सीमा में घुसता दिखाई दे तोह सीधा गोली मारने का अधिकार होगा भारत के सैनिको के पास. यह कानून इसीलिए जरुरी है क्यूंकि आज भारत की सीमा पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है इसी कारण पडोसी देशो जैसे की बांग्लादेश और नेपाल के रस्ते पाकिस्तानी हमारे देश में घुस जाते है और आतंकवाद मचाते है .. वहीँ दूसरी ओर भारत के संसाधनों का उपयोग करके भारत को ही बर्बाद करते है , भारत का आम नागरिक संसाधनों की कमी से भी झुजता है ..
      ४. Universal Civil Code: इस कानून के तहत भारत का हर व्यक्ति समान होगा .. सबके लिए कानून एक होगा .. ना कोई हिन्दू होगा और ना ही कोई मुस्लिम होगा .. आज भारत में ऐसा कोई भी कानून नहीं है ! ..
      --------------------------------------------------------
      कृपया करके अपनी राय और अपनी टिपण्णी जरुर दे .. और अपने मित्रो के साथ भी इस लेख को शेयर करें ताकी वो भी अपनी राय रख सके |
      भारत माता की जय
      जय श्री राम.

      शुक्रवार, 23 नवंबर 2012

      सरकार की दोगली नीति ... विकास पुंडीर

      विकास पुंडीर हिन्दू राष्ट्रवादी'

      ज्यादा से ज्यादा "Share" करे,ताकि हर हिन्दुस्तानी जान सके .
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सोनिया गाँधी के "निजी मनोरंजन क्लब" यानी नेशनल एडवायज़री काउंसिल (NAC) द्वारा सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है जिसके प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं-

1) कानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, लेकिन इस बिल के अनुसार यदि केन्द्र को "महसूस" होता है तो वह साम्प्रदायिक दंगों की तीव्रता के अनुसार राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है और उसे बर्खास्त कर सकता है…

(इसका मोटा अर्थ यह है कि यदि 100-200 कांग्रेसी अथवा 100-50 जेहादी तत्व किसी राज्य में दंगा फ़ैला दें तो राज्य सरकार की बर्खास्तगी आसानी से की जा सकेगी)…

2) इस प्रस्तावित विधेयक के अनुसार दंगा हमेशा "बहुसंख्यकों" द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि "अल्पसंख्यक" हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं…

3) यदि दंगों के दौरान किसी "अल्पसंख्यक" महिला से बलात्कार होता है तो इस बिल में कड़े प्रावधान हैं, जबकि "बहुसंख्यक" वर्ग की महिला का बलात्कार होने की दशा में इस कानून में कुछ नहीं है…

4) किसी विशेष समुदाय (यानी अल्पसंख्यकों) के खिलाफ़ "घृणा अभियान" चलाना भी दण्डनीय अपराध है (फ़ेसबुक, ट्वीट और ब्लॉग भी शामिल)…

5) "अल्पसंख्यक समुदाय" के किसी सदस्य को इस कानून के तहत सजा नहीं दी जा सकती यदि उसने बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ़ दंगा अपराध किया है (क्योंकि कानून में पहले ही मान लिया गया है कि सिर्फ़ "बहुसंख्यक समुदाय" ही हिंसक और आक्रामक होता है, जबकि अल्पसंख्यक तो अपनी आत्मरक्षा कर रहा है)…

इस विधेयक के तमाम बिन्दुओं का ड्राफ़्ट तैयार किया है, सोनिया गाँधी की "किचन कैबिनेट" के सुपर-सेकुलर सदस्यों एवं अण्णा को कठपुतली बनाकर नचाने वाले IAS व NGO गैंग के टट्टुओं ने… इस बिल की ड्राफ़्टिंग कमेटी के सदस्यों के नाम पढ़कर ही आप समझ जाएंगे कि यह बिल "क्यों", "किसलिये" और "किसको लक्ष्य बनाकर" तैयार किया गया है…। "माननीय"(?) सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं - हर्ष मंदर, अरुणा रॉय, तीस्ता सीतलवाड, राम पुनियानी, जॉन दयाल, शबनम हाशमी, सैयद शहाबुद्दीन… यानी सब के सब एक नम्बर के "छँटे हुए" सेकुलर… । "वे" तो सिद्ध कर ही देंगे कि "बहुसंख्यक समुदाय" ही हमलावर होता है और बलात्कारी भी…

अब यह विधेयक संसद में रखा जाएगा, फ़िर स्थायी समिति के पास जाएगा, तथा अगले लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इसे पास किया जाएगा, ताकि मुस्लिम वोटों की फ़सल काटी जा सके तथा भाजपा की राज्य सरकारों पर बर्खास्तगी की तलवार टांगी जा सके…। यह बिल लोकसभा में पास हो ही जाएगा, क्योंकि भाजपा के अलावा कोई और पार्टी इसका विरोध नहीं करेगी…। जो बन पड़े उखाड़ लो..

और दीजिये वोट कांग्रेस को..

जागो हिन्दुओ जागो.
आखिर कब तक सोओगे??
आखिर कब तक??
      सोनिया गाँधी के "निजी मनोरंजन क्लब" यानी नेशनल एडवायज़री

      काउंसिल (NAC) द्वारा सांप्रदायिक एवं लक्षित हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है जिसके प्रमुख बिन्दु इस प्रकार हैं-
      1) कानून-व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, लेकिन इस बिल के अनुसार यदि केन्द्र को "महसूस" होता है तो वह साम्प्रदायिक दंगों की तीव्रता के अनुसार राज्य सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप कर सकता है और उसे बर्खास्त कर सकता है…
      (इसका मोटा अर्थ यह है कि यदि 100-200 कांग्रेसी अथवा 100-50 जेहादी तत्व किसी राज्य में दंगा फ़ैला दें तो राज्य सरकार की बर्खास्तगी आसानी से की जा सकेगी)…
      2) इस प्रस्तावित विधेयक के अनुसार दंगा हमेशा "बहुसंख्यकों" द्वारा ही फ़ैलाया जाता है, जबकि "अल्पसंख्यक" हमेशा हिंसा का लक्ष्य होते हैं…
      3) यदि दंगों के दौरान किसी "अल्पसंख्यक" महिला से बलात्कार होता है तो इस बिल में कड़े प्रावधान हैं, जबकि "बहुसंख्यक" वर्ग की महिला का बलात्कार होने की दशा में इस कानून में कुछ नहीं है…
      4) किसी विशेष समुदाय (यानी अल्पसंख्यकों) के खिलाफ़ "घृणा अभियान" चलाना भी दण्डनीय अपराध है (फ़ेसबुक, ट्वीट और ब्लॉग भी शामिल)…
      5) "अल्पसंख्यक समुदाय" के किसी सदस्य को इस कानून के तहत सजा नहीं दी जा सकती यदि उसने बहुसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ़ दंगा अपराध किया है (क्योंकि कानून में पहले ही मान लिया गया है कि सिर्फ़ "बहुसंख्यक समुदाय" ही हिंसक और आक्रामक होता है, जबकि अल्पसंख्यक तो अपनी आत्मरक्षा कर रहा है)…
      इस विधेयक के तमाम बिन्दुओं का ड्राफ़्ट तैयार किया है, सोनिया गाँधी की "किचन कैबिनेट" के सुपर-सेकुलर सदस्यों एवं अण्णा को कठपुतली बनाकर नचाने वाले IAS व NGO गैंग के टट्टुओं ने… इस बिल की ड्राफ़्टिंग कमेटी के सदस्यों के नाम पढ़कर ही आप समझ जाएंगे कि यह बिल "क्यों", "किसलिये" और "किसको लक्ष्य बनाकर" तैयार किया गया है…। "माननीय"(?) सदस्यों के नाम इस प्रकार हैं - हर्ष मंदर, अरुणा रॉय, तीस्ता सीतलवाड, राम पुनियानी, जॉन दयाल, शबनम हाशमी, सैयद शहाबुद्दीन… यानी सब के सब एक नम्बर के "छँटे हुए" सेकुलर… । "वे" तो सिद्ध कर ही देंगे कि "बहुसंख्यक समुदाय" ही हमलावर होता है और बलात्कारी भी…
      अब यह विधेयक संसद में रखा जाएगा, फ़िर स्थायी समिति के पास जाएगा, तथा अगले लोकसभा चुनाव के ठीक पहले इसे पास किया जाएगा, ताकि मुस्लिम वोटों की फ़सल काटी जा सके तथा भाजपा की राज्य सरकारों पर बर्खास्तगी की तलवार टांगी जा सके…। यह बिल लोकसभा में पास हो ही जाएगा, क्योंकि भाजपा के अलावा कोई और पार्टी इसका विरोध नहीं करेगी…। जो बन पड़े उखाड़ लो..
      और दीजिये वोट कांग्रेस को..
      जागो हिन्दुओ जागो.
      आखिर कब तक सोओगे??
      आखिर कब तक??

      गुरुवार, 22 नवंबर 2012

      डूब मरें ऐसी औलादें.... समीर सिंह

      Sameer Singh

      इसे एक बार ज़रूर पढ़े ......।।।।
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      बात दुर्ग के रेलवे स्टेशन की है .., कल रात .,मैं ट्रेन के इंतज़ार में रेल्वे - प्लेटफार्म पर टहल रहा था .,
      एक वृद्ध महिला , जिनकी उम्र लगभग 60 - 65 वर्ष के लगभग रही होगी ., वो मेरे पास आयी और मुझसे खाने के लिए पैसे माँगने लगी ....
      उनके कपडे फटे ., पूरे तार - तार थे ., उनकी दयनीय हालत देख कर ऐसा लग रहा था की पिछले कई द

      िनों से भोजन भी ना किया हो ..
      मुझे उनकी दशा पर बहुत तरस आया तो मैंने अपना पर्स टटोला ., कुछ तीस रुपये के आसपास छुट्टे पैसे और एक हरा " गांधी " मेरे पर्स में था .,
      मैंने वो पूरे छुट्टे उन्हें दे दिए...
      मैंने पैसे उन्हें दिए ही थे ., की इतने में एक महिला ., एक छोटे से रोते - बिलखते., दूधमुहे बच्चे के साथ टपक पड़ी ., और छोटे दूधमुहे बच्चे का वास्ता देकर वो भी मुझसे पैसे माँगने लगी ... मैं उस दूसरी महिला को कोई ज़वाब दे पाता की उन वृद्ध माताजी ने वो सारे पैसे उस दूसरी महिला को दे दिए ., जो मैंने उन्हें दिए थे .... पैसे लेकर वो महिला तो चलती बनी... लेकिन मैं सोच में पड़ गया ... मैंने उनसे पूछा की-" आपने वो पैसे उस महिला को दे दिए ..??? "
      उनका ज़वाब आया -" उस महिला के साथ उसका छोटा सा दूधमुहा बच्चा भी तो था ., मैं भूखे रह लूंगी लेकिन वो छोटा बच्चा बगैर दूध के कैसे रह पायेगा ... ??? भूख के मारे रो भी रहा था ..."
      उनका ज़वाब सुनकर मैं स्तब्ध रह गया .... सच ... भूखे पेट भी कितनी बड़ी मानवता की बात उनके ज़ेहन में बसी थी ....
      उनकी सोच से मैं प्रभावित हुआ ., तो उनसे यूं ही पूछ लिया की यूं दर -बदर की ठोकरे खाने के पीछे आखिर कारण क्या है ...???
      उनका ज़वाब आया की उनके दोनों बेटो ने शादी के बाद उन्हें साथ रखने से इनकार कर दिया ., पति भी चल बसे .., आखिर में कोई चारा न बसा ...
      बेटो ने तो दुत्कार दिया ., लेकिन वो भी हर बच्चे में अपने दोनों बेटो को ही देखती है ., इतना कहकर उनकी आँखों में आंसू आ गए ...
      मैं भी भावुक हो गया .,मैंने पास की एक कैंटीन से उन्हें खाने का सामान ला दिया ... मैं भी वहा से फिर साईड हट गया ...
      लेकिन बार-बार ज़ेहन में यही बात आ रही थी ., की आज की पीढी कैसी निर्लज्ज है ., जो अपनी जन्म देने वाली माँ तक को सहारा नहीं दे सकती ...??? लानत है ऐसी संतान पर .... और दूसरी तरफ वो " माँ " ., जिसे हर बच्चे में अपने " बेटे " दिखाई देते है ....
      धन्य है " मातृत्व-प्रेम ".......

      इसे एक बार ज़रूर पढ़े ......।।।।
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बात दुर्ग के रेलवे स्टेशन की है .., कल रात .,मैं  ट्रेन के इंतज़ार में  रेल्वे - प्लेटफार्म  पर टहल रहा था ., 
एक वृद्ध महिला , जिनकी उम्र लगभग 60 - 65 वर्ष के लगभग रही होगी ., वो  मेरे पास  आयी और मुझसे खाने के लिए पैसे माँगने लगी ....  
उनके कपडे फटे ., पूरे तार - तार थे ., उनकी दयनीय हालत देख  कर ऐसा लग रहा था की पिछले कई दिनों  से  भोजन भी  ना किया हो ..
मुझे उनकी दशा पर बहुत तरस आया तो मैंने अपना पर्स टटोला ., कुछ तीस रुपये के आसपास छुट्टे पैसे और एक हरा " गांधी " मेरे पर्स में था .,
मैंने वो पूरे छुट्टे उन्हें दे दिए...

मैंने पैसे उन्हें दिए ही थे ., की इतने में एक महिला ., एक छोटे से रोते - बिलखते., दूधमुहे बच्चे के साथ टपक पड़ी ., और छोटे दूधमुहे बच्चे का वास्ता देकर  वो भी मुझसे पैसे माँगने लगी ... मैं उस दूसरी महिला को कोई ज़वाब दे पाता  की उन वृद्ध माताजी ने वो  सारे पैसे उस दूसरी महिला को दे दिए ., जो मैंने उन्हें दिए थे .... पैसे लेकर वो महिला तो चलती  बनी... लेकिन मैं सोच में पड़  गया ... मैंने   उनसे पूछा की-" आपने वो पैसे उस महिला को  दे दिए ..??? "
उनका ज़वाब आया -" उस महिला के साथ उसका छोटा सा   दूधमुहा बच्चा भी तो था ., मैं भूखे रह लूंगी लेकिन वो छोटा बच्चा बगैर दूध के कैसे रह पायेगा ... ???  भूख के मारे रो भी रहा था ..."
उनका ज़वाब सुनकर मैं स्तब्ध रह गया .... सच ... भूखे पेट भी कितनी बड़ी मानवता की बात उनके ज़ेहन में बसी थी ....

उनकी सोच से मैं प्रभावित हुआ ., तो उनसे यूं  ही पूछ लिया की यूं दर -बदर की ठोकरे खाने के पीछे आखिर कारण क्या है ...???
उनका ज़वाब आया की उनके दोनों बेटो ने शादी के बाद उन्हें साथ रखने से इनकार कर दिया ., पति भी चल बसे .., आखिर में कोई चारा न बसा ...
बेटो ने तो दुत्कार दिया ., लेकिन वो  भी हर बच्चे में अपने दोनों बेटो को ही देखती है ., इतना कहकर उनकी आँखों में आंसू आ गए ...

मैं भी भावुक हो गया .,मैंने  पास की एक कैंटीन से उन्हें खाने का सामान ला दिया ... मैं भी वहा  से फिर साईड  हट गया ...
लेकिन बार-बार ज़ेहन में यही बात आ रही थी ., की आज की पीढी कैसी निर्लज्ज है ., जो अपनी जन्म देने वाली माँ तक को सहारा  नहीं दे सकती ...??? लानत  है  ऐसी संतान   पर .... और दूसरी तरफ वो " माँ " ., जिसे हर बच्चे में अपने " बेटे " दिखाई देते है ....
धन्य है " मातृत्व-प्रेम ".........